tag:blogger.com,1999:blog-8397064.post110283271320893905..comments2008-05-23T07:30:35.434+03:00Comments on मेरा पन्ना: बउवा पुराण:भाग दोJitendra Chaudharyhttp://www.blogger.com/profile/09573786385391773022noreply@blogger.comBlogger3125tag:blogger.com,1999:blog-8397064.post-1103135027165372552004-12-15T21:23:00.000+03:002004-12-15T21:23:00.000+03:00शुकुल, अब आलोक ने नहीं पूछा तो हमीं कन्फर्म किये ल...शुकुल, अब आलोक ने नहीं पूछा तो हमीं कन्फर्म किये लेते हैं- कठकरेजा में 'कठ' का शाब्दिक अर्थ काठ है या कठोर. यानी पूरे शब्द का अर्थ काठ जैसे कलेजे वाला है या कठोर कलेजे वाला?
अब यह मत कहना कि चाहे चाकू लौकी पर गिरे या अदरवाइज.....
वैसे जितेन्दर का पुराण मस्त रहा. सारे लोग कथा सुनने के बाद पंजीरी-बतासे खा लेना. आगे बउवा का क्या हआ? अरोरा चक्की में उनकी नौकरी रही या रास्ता दिखा दिया गया? फिर इंद्र अवस्थीhttp://www.blogger.com/profile/08625731001861201733noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8397064.post-1102968590061707362004-12-13T23:09:00.000+03:002004-12-13T23:09:00.000+03:00शैल से जो छूट गया लिखने को --"गोया खुद के साथ घटी ...शैल से जो छूट गया लिखने को --"गोया खुद के साथ घटी हों".
तुम यार बड़े कठकरेजा लेखक हो.कहीं ऐसे पिटवाया जाता है प्रेमियों को! किसी ने यह भी नही कहा -"अरे-अरे मत मारो बिचारा बहुत पिट गया".तुम तो लगता है पूरे तुलसीदास हो गये.उनकी बीबी रत्नावली ने उनको दुत्कारा तो उन्होंने यथासंभव मियां-बीबी को मिलने नहीं दिया.राम-सीता,लक्ष्मण-उर्मिला.यह तुम्हारी व्यक्तिगत बात है यही मानकर देवाशीष ने इसे ब्लागमेला अनूप शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/07001026538357885879noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8397064.post-1102946933784728092004-12-13T17:08:00.000+03:002004-12-13T17:08:00.000+03:00मानना पड़ेगा, आपकी याददाश्त और लेखनी को.सारी बातें ...मानना पड़ेगा, आपकी याददाश्त और लेखनी को.सारी बातें इस तरह लिखी हैं,जैसे आज ही घटित हुईं हैं.Shailhttp://www.blogger.com/profile/05576373810855503870noreply@blogger.com