tag:blogger.com,1999:blog-8397064.post-1101964017991951342004-12-02T08:05:00.000+03:002004-12-02T08:15:49.946+03:00मिर्जा की फरमाइशहमारे मिर्जा साहब की स्पेशल फरमाइशो पर इन्हे भी देखियें.....
मै रोया परदेस मे भीगा मां का प्यार
दुख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार
छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार
आंखो भर आकाश है बाहों भर संसार
-निदा फाजलीपूरा यहाँ पढिये http://www.geocities.com/sumankghai/nida22.html
नज्म उलझी हुई है सीने मे
मिसरे अटके हुए है होठों पर
उड़ते फिरते है तितलियों की तरह
लफ्ज कागज पर बैठते ही नही
Jitendra Chaudharyhttp://www.blogger.com/profile/09573786385391773022noreply@blogger.com