tag:blogger.com,1999:blog-8397064.post-1103176682051221272004-12-16T08:54:00.001+03:002004-12-16T11:35:32.593+03:00गप्प सुनो भाई गप्पबात उन दिनो की है, जब मुम्बई को बम्बई के नाम से ही जाना जाता था. काफी साल पुरानी बात है, कि हमारे एक रिश्तेदार बम्बई से कानपुर किसी शादी मे पधारे... तब मोहल्ले मे किसी के घर भी आया मेहमान, सबका मेहमान होता था, काफी आवभगत होती थी. लोग हालचाल पूछने आते थे, अपने घर खाने के लिये भी बुलाते थे. तो हुआ यों कि इन मेहमान जनाब जिनको,सिर्फ दो ही शौँक थे, पेट भर के खाना और बम्बई की गप्पे सुना सुना कर उसका Jitendra Chaudharyhttp://www.blogger.com/profile/09573786385391773022noreply@blogger.com